Ruchi Shukla

Heights of emotion................Direct Dil Se...

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वो...

Posted On: 25 Feb, 2017 में

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वो सबकुछ जानकर अनजान सा है
खुद अपने घर में एक मेहमान सा है
कभी फिरता है राहों में अकेला
भरी महफिल में भी वीरान सा है
उसकी आंखों में सन्नाटा घना है
मगर दिल में कोई तूफान सा है
कोई पूछे तो कह देना हकीकत
वो जिसके इश्क में बदनाम सा है

वो सबकुछ जानकर अनजान सा है

खुद अपने घर में एक मेहमान सा है

कभी फिरता है राहों में अकेला

भरी महफिल में भी वीरान सा है

उसकी आंखों में सन्नाटा घना है

मगर दिल में कोई तूफान सा है

कोई पूछे तो कह देना हकीकत

वो किसके इश्क में बदनाम सा है

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajeev Varshney के द्वारा
February 26, 2017

सुन्दर भावपूर्ण कविता, बधाई.

Alka के द्वारा
March 1, 2017

रूचि जी , भावपूर्ण सुन्दर रचना |

ruchishukla के द्वारा
March 16, 2017

शुक्रिया अल्का जी

ruchishukla के द्वारा
March 16, 2017

राजीव जी आपका बहुत आभार


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