Ruchi Shukla

Heights of emotion................Direct Dil Se...

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बेबाक यादें..........

Posted On: 18 Aug, 2013 Others में

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एक धुंधला साया यादों का…
मेरा पीछा सा करता है…
वो बिना बुलाए मेहमां सा…
जब जी चाहे आ जाता है…
सारे ग़म सहकर, चुपरहकर
हंसते-खिलते जीना चाहूं…
तो वो उदण्ड शिशु जैसे…
मेरे जख्मों से खेलता है…
एक धुंधला साया यादों का…
मेरा पीछा सा करता है…



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
August 27, 2013

सुन्दर प्रस्तुति.जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनायें- कभी यहाँ भी पधारें

ruchishukla के द्वारा
July 8, 2016

थोड़ी देर हो गई क्षमा के साथ शुक्रिया स्वीकर करें

Brandywine के द्वारा
July 20, 2016

That’s a genuinely impivssree answer.


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